हरियाणवी मनोरंजन

हरियाणा में बहुत ही मजाकिया किस्म के लोग रहते हैं। वे हर बात में मजाक ढूंढते है। अक्सर हरियाणा के लोग बात करते करते चुटकुले बना देते हैं। हरियाणा के गावों में आज भी चौपाल में बैठकर हंसी ठिठौली करते हैं। अक्सर शाम को बैठकर मखौल करते हैं । उनके मखौल में असली हरियाणवी संस्कृति की खुशबू आती है। हरियाणा के बुजुर्ग शाम होते ही हुक्के की गुड़गुड़ाहट के साथ ताश खेलते हुए नई पीढ़ी के पाश्चात्य संस्कृति की तरफ भागते हुए देखकर अपनी पुरानी यादें ताजा करते हैं।

हरियाणा की गावों की महिलाऐं आज भी असली हरियाणवी संस्कृति को संजोए हुए है। गावों में औरतें आज भी घाघरा चोली पहनती हैं। आज हरियाणा के हर गांव में बिजली पानी की सुविधा है। परन्तु महिलाऐं शाम को इकट्ठी होकर कुओं पर पानी लेने जाती है। वहां वो आपस में हंसी मजाक करके पुरे दिन की थकान उतरती हैं। जब भी किसी घर में शादी ब्याह (विवाह) हो तो महिलाऐं 15 – 20 दिन पहले ही गीत गाना शुरू कर देती हैं। ये हरियाणवी महिलाओं के लोग गीत होते हैं। वे गीतों के साथ साथ नाचती भी हैं। यही नाच गाना हरियाणवी महिलाओं का मनोरंजन का असली साधन है। परन्तु आज की नई पीढ़ी इन सबको छोड़कर नए फ़िल्मी गानों को पसंद करते हैं। उन्हें यह सब रुढ़िवादी लगता है 

चुटकुले

हरियाणवी लोकगीत

हरियाणवी कविताएँ

हरियाणवी शायरी

हरियाणवी रागनी

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